क्या बिजली विभाग के टेक्निकल कर्मचारी दफ्तर छोड़ कर वापिस फील्ड में आएंगे

यह मुद्दा हरियाणा में तेजी से उठ रहा है कि क्या बिजली विभाग (निगम) के तकनीकी कर्मचारी एक बार फिर फील्ड में लौटेंगे? हाल ही में शिक्षा विभाग द्वारा लिया गया कड़ा निर्णय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जनता का कहना है कि जब शिक्षा विभाग अपने कर्मचारियों को ग्राउंड स्तर पर सक्रिय कर सकता है, तो क्या बिजली विभाग भी वही कदम उठा पाएगा?

लोगों की नाराज़गी का मुख्य कारण यह है कि फील्ड में काम धीमा पड़ा हुआ है, मेंटेनेंस से जुड़े कई कार्य समय पर पूरे नहीं हो रहे। ट्रांसफार्मर खराब हों, लाइनों में दिक्कत आए या कनेक्शन में समस्या — शिकायतें तो दर्ज होती हैं, लेकिन उनका समाधान उतना तेज़ नहीं दिखता। दूसरी तरफ, तकनीकी स्टाफ का बड़ा हिस्सा दफ्तरों में बैठा रहने की बात जनता के बीच असंतोष बढ़ा रही है।

जनता साफ तौर पर कह रही है कि सेवाएँ तभी सुधरेंगी जब कर्मचारी फील्ड में सक्रिय रूप से मौजूद रहेंगे। पारदर्शिता और जवाबदेही ही बिजली व्यवस्था को मजबूत बना सकती है। यदि शिक्षा विभाग साहसिक निर्णय ले सकता है, तो अब यह देखने वाली बात होगी कि क्या बिजली निगम भी वही तत्परता दिखाकर ग्राउंड लेवल कार्य को फिर से मजबूत करेगा?

फैसले का इंतज़ार अब जनता कर रही है — उम्मीदों के साथ, सवालों के साथ।

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